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IPC और BNS में क्या अंतर है?

2026-02-26लेखक: HeliusDev285 words

भारत में 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) लागू हो गई है, जिसने पुराने भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) को पूरी तरह बदल दिया है............

IPC और BNS में क्या अंतर है?
भारत में 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) लागू हो गई है, जिसने पुराने भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) को पूरी तरह बदल दिया है। नीचे आसान भाषा में दोनों के मुख्य अंतर समझिए: 📜 1. लागू होने का समय IPC BNS 1860 में लागू (ब्रिटिश काल) 2023 में पारित, 1 जुलाई 2024 से लागू औपनिवेशिक सोच पर आधारित भारतीय संदर्भ और आधुनिक जरूरतों पर आधारित 📊 2. धाराओं की संख्या IPC BNS 511 धाराएँ 358 धाराएँ कई प्रावधान पुराने और दोहराव वाले धाराएँ पुनर्गठित, सरल और संयोजित 🚫 3. राजद्रोह (Sedition) IPC में धारा 124A – राजद्रोह का प्रावधान था। BNS में “राजद्रोह” शब्द हटाया गया है और उसकी जगह राष्ट्र की संप्रभुता/एकता के विरुद्ध अपराध को नए रूप में परिभाषित किया गया है। 👉 मतलब: शब्द बदला और दायरा भी बदला गया। 👩‍⚖️ 4. नई सजा – सामुदायिक सेवा IPC में केवल जेल या जुर्माना प्रमुख सजा थी। BNS में पहली बार Community Service (सामुदायिक सेवा) को सजा के रूप में शामिल किया गया है (छोटे अपराधों में)। 💻 5. आधुनिक अपराधों का समावेश IPC BNS डिजिटल अपराधों पर सीमित प्रावधान साइबर, संगठित अपराध, आतंकवाद जैसे अपराधों पर स्पष्ट प्रावधान मॉब लिंचिंग का अलग उल्लेख नहीं मॉब लिंचिंग को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया 👩 महिलाओं और बच्चों से जुड़े बदलाव महिलाओं के खिलाफ अपराधों को और स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया। नाबालिगों के मामलों में सख्त प्रावधान। 🔄 7. भाषा और संरचना IPC की भाषा जटिल और पुरानी अंग्रेज़ी शैली की थी। BNS की भाषा अपेक्षाकृत सरल और आधुनिक कानूनी शैली में है। 🎯 मुख्य अंतर एक लाइन में 👉 IPC = ब्रिटिश काल का दंड कानून 👉 BNS = आधुनिक भारत के लिए पुनर्गठित आपराधिक कानून
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